اقرأ باسم ربك الذي خلق

सोमवार और जुमेरात का इखत्ता रोज़ ना रख सके तो क्या सिर्फ सोमवार का रोज़ा रख लिया जाए?


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सावल:

क्या अगर सोमवार और जुमेरात का इखत्ता रोज़ ना रख सके तो क्या सिर्फ सोमवार का रोज़ा रख लिया जाये?

जवाब:

अलहमदुलि्लाह, 

"हफ़्ते में दो मज़कूरा यम के रोज़े में से एक रोज़ा रखने में कोई हर्ज़ नहीं, अय्याम के रोज़ा रखना सुन्नत है वाजिब नहीं, इसलिए जो सोमवार (पीर) और जुमेरात दोनों रोज़ रखता है तो हमने ख़ैर ए अज़ीम वाला अमल किया, और दोनो को जमा करना और दोनो को रोज़ रखना वाजिब नहीं।

बल्के हफ़्ते में दोनों रोज़ रखना मुस्तहब है, इसलिए के सही अहादीस में नबी ﷺ से ये दोनों रोज़ रखना साबित है।”

मजमू फतवा अश शेख इब्न बाज़ (१५/३८६)।