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रिश्तेदारो को जकात देना


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अल्हम्दुलिल्लाह..

जो रिश्तेदार जकात के मुश्तहिक हैं उनको जकात देना ज्यादा बेहतर है इसके बैनिस्बत की जो लोग आपके रिश्तेदार न हों क्योंकि रिश्तेदारों को जकात देना सदका और सिला-रहमी डोनो है।

۩ सलमान बिन अमीर र.अ. रिवायत करते हैं कि रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया, "किसी गरीब को सदका देना तो (आम; आम) सदका है लेकिन रिस्तेदारों को सदका देना (२) चीज है, एक तो सदका और दूसरा सिला-रहमी।"

जामिया तिर्मिज़ी, किताब अज़ ज़कात (७), हदीस- ६५८. इसे दारुस्सलाम ने सही करार दिया है।

लेकिन अगर ये रिश्तेदार उन में हो जिनपर आपका खर्च करना आपके ज़िम्मे लाज़िम हो और आप उन्हें जकात देकर अपना माल बचाएं तो ये जैज़ नहीं है।

फतवा अल-शेख मुहम्मद अल-सालिह अल-उथैमीन, १/४६१।